मोति चन्द (40 वर्ष, दिल्ली मानमिन चर्च, भारत)

बिना माता-पिता और बिना शिक्षा के चलते मेरा बचमन एक डरा-सहमा और आत्मविश्वास रहित गुज़रा। साथ ही मुझे कमर में बहुत गंभीर दर्द रहता था। दिल्ली मानमिन चर्च में मैंने डाक्टर जेराक ली की बीमारों की प्रार्थना को टेलिविज़न पर प्राप्त किया और मैंने कमर दर्द से चंगाई को प्राप्त किया। धन्यवादी हृदय के साथ मैंने लोगों को सुसमाचार का प्रचार करना शुरू किया जिससे मेरा स्वभाव बदल गया। मेरा डरा-सहमा स्वभाव खत्म हो गया।

परमेश्वर के अनुग्रह से जिस प्रकार मेरा जीवन बदल गया, वैसे ही मैं उम्मीद करता था कि मेरा गाँव भी उसी प्रकार से बदल जाएं। उत्तर प्रदेश के गोरखपूर में मेरा गाँव भारत के दूरस्थ क्षेत्र में स्थित है। वहाँ के लोगों ने कभी भी यीशु हमारे उ़द्धारकर्ता के बारे में नही सुना था। इसलिए मैंने उनके लिए प्रार्थना करना शुरू किया।

मई 2018 में मैं अपने गाँव गया था उस समय मेरे एक रिश्तेदार का विवाह हो रहा था। जो लोग विवाह में आए थे मैंने उन्हे यीशु मसीह का परिचय दिया और दूसरे परिवारों को भी बताया। मैंने उन्हे बताया कि जो कुछ बाइबल में लिखा है वह अभी भी हो रहा है। तब मैंने उनके लिए उस रूमाल से प्रार्थना की, जिस पर डाक्टर जेराक ली ने प्रार्थना की थी। (पे्ररितो-19:11-12)

वहाँ पर एक हैरान कर देने वाली घटना हुई। एक महिला जिसका नाम सीमा है (35), उनका आधा शरीर लकवाग्रस्त था। वह बिना सहारे के चल नही पाती थी। इस कारण से वह कोई काम भी नही कर पाती थी। परन्तु परमेश्वर की सामर्थ्य के रूमाल से प्रार्थना प्राप्त करने के बाद उसने चलना शुरू कर दिया और अपनी बांहिनी बांह को भी उठाया।

तीन वर्ष का एक बच्चा, अंकुश, जो जन्म से ही नही चल सकता था, प्रार्थना को प्राप्त करने के बाद चलने लग गया। बहुत से लोगों ने गवाही दी कि उनके विभिन्न प्रकार के दर्द ठीक हो गए, और लोगों ने प्रभु को मानना शुरू किया।

उसके बाद मेरा परिवार गाँव चला गया और परमेश्वर के वचन का प्रचार करना शुरू किया। यद्यपि वहाँ कोई चर्च नही था, परन्तु लोगों ने मानमिन सैंट्रल चर्च की सभाओं में जीसीएन टीवी हिन्दी के यूट्युब पर सीधे प्रसारण के द्वारा सभाओं में शामिल होना शुरू कर दिया। वे हर दिन दानिय्ये प्रार्थना सभा में शामिल होते थे और मिलकर प्रार्थना करते थे।

गाँव में लोग प्रभु को नही जानते थे, उनके जीवन में तरह तरह की समस्याऐं थी। परन्तु डाक्टर जेराक ली की बीमारों की प्रार्थनओं के द्वारा और परमेश्वर की सामर्थ्य के रूमाल के द्वारा, न केवल उन्होने बीमारियों से चंगाई प्राप्त की वरन उन्होने अपनी समस्यओं का भी समाधान प्राप्त किया।

अनिता, मेरी भतीजी, कुछ वर्षों पहले भूत-ग्रसित हो गई थी। डाक्टर जेराक ली के प्रचार को सुनने के बाद उसने मूर्तिपूजाओं के लिए पश्चाताप किया और रूमाल से प्रार्थना को प्राप्त करने पर, पवित्रआत्मा की आग उसके ऊपर उतरी, और भूत उसमें से निकल गया। अब वह स्वस्थ है और उसका परिवार फिर से खुशहाल हो गया है।

मनीश ने अपने सिर पर फोड़े से चंगाई प्राप्त की, रोशनी ने प्रदर (Leucorrhoea ) से चंगाई प्राप्त की, प्रभु नामक व्यक्ति ने बवासीर से चंगाई पाई और जंगबहादूर ने बुखार से चंगाई प्राप्त की। दूर्गावती को एक स्वस्थ बच्चा होने की आशीष प्राप्त हुई। परमेश्वर के अद्भुत कार्य निरंतर यहाँ पर हो रहे है। सबसे बड़ी आशीष यह है कि अब हमारे पास यहाँ पर 50 से भी अधिक लोगों की “गृह-कलीसिया” है।

मैं सारा धन्यवाद और महिमा परमेश्वर को देता हूँ जिसने मुझे आशीषित किया कि मैं प्रभु के अनुग्रह के द्वारा सुसमाचार का प्रचार करूँ।

“जीवन की कलीसिया ने मुझे परमेश्वर की आशीषें पाने का भेद सिखाया!“

एल्डर वू-योंग यांग (71 वर्ष, 1-5 पेरिश)

मेरी पत्नी की निरंतर प्रयासों के लिए मैं धन्यवाद देता हूँ। 1992 में मैंने मानमिन चर्च में पंजीकरण कराया। क्योंकि मैं बुद्धा पर विश्वास करने वाले परिवार में पैदा हुआ था, मैं परमेश्वर के बारे में कुछ नही जानता था। मैं मसीह जीवन के अर्थ को नही समझता था। मेरा जीवन केवल चर्च आने-जाने तक की सीमित था।

मगर, मई 2000 में, जब दो सप्ताह की विशेष ईश्वरीय चंगाई सभा चल रही थी, तब मैंने देखा कि जब डाक्टर जेराक ली ने बीमारों के लिए प्रार्थनओं की तो लंगड़े चलने लग गए। मैंने एहसास किया कि परमेश्वर जीवित है और मैं अपने आँसू रोक नही पाया। तब से, मैंने हमेशा प्रभु के दिन को पवित्र माना है और परमेश्वर के द्वारा दिये गये कार्यां को विश्वासयोग्यता के साथ किया है।

2002 में, मुझे डाक्टर जेराक ली के, भारत में हो रहे, भारत चमत्कार चंगाई उत्सव में शामिल होने के लिए आंमत्रित किया गया। मैंने परमेश्वर की सामर्थ्य के कार्यों को देखा। 30 लाख से भी अधिक लोगा वहाँ एकत्र हुए थे और असंख्य लोगों ने चंगाई को प्राप्त किया- मुझे जीवित परमेश्वर का और भी अधिक निश्चय हो गया और मेरा विश्वास और भी मज़बूत हो गया।

2004, जून में, मेरे पेट में गंभीर दर्द हुआ। जाँच में डाक्टर ने पाया कि यह एपेंडिसाइटिस है, और तुरंत ही सर्जरी की सलाह दी। परन्तु मैं डाक्टर जेराक ली के पास गया और उन्हें बताया कि जब से मेरा दिवालिया निकला है तब से मैंने संपूर्ण दशमांश नही दिया है। मेरे पश्चाताप करने के बाद, उन्होने मेरे लिए प्रार्थना की। प्रार्थना के अंत मे जब मैंने “आमीन“ कहा, मेरा दर्द गायब हो गया। मैं अच्छे से खाना खाने भी लग गया। बाद में, आस्पताल की जाँच में पाया गया कि मुझे कोई बीमारी नही है।

जीवित परमेश्वर से व्यक्तिगत अनुभव करने के बाद, मैं समझ पाया कि डाक्टर जेराक ली ने सबसे पहले परमेश्वर से प्रेम किया है। इसलिए वे लोगों से भी इतना अधिक प्रेम करते थे कि उन्होने परमेश्वर की सामर्थ्य को पाने के लिए विनती की, ताकि वो लोगों को प्रभु मे ला सकें। इसलिए मैं इस बात के लिए धन्यवादी था।

तब से, मेरे जीवन मैं बहुत सारे बदलाव हुए है। मैंने अपने ज्ञान पर निर्भर रहना छोड़ दिया। डाक्टर जेराक ली की शिक्षा के अनुसार मैंने अपना व्यवसाय भी उचित रिति से चलाना शुरू किया। मैंने अपने लालच भरे सपनों को छोड़ दिया। मैंने शून्य से शुरू किया, परन्तु मैंने अपने फायदे की कोई भी योजनाओं को नही अपनाया। चाहे स्थिति बहुत ही बुरी क्यों न थी, तो भी मेरा व्यवसाय अच्छा चलता गया। परमेश्वर ने लोगों को मेरे पास भेजा जो मेरे व्यवसाय में मद्द कर सकते थे जैसे कि विज्ञापनों में। मैं परमेश्वर की मद्द के लिए धन्यवाद देता हूँ कि मेरा व्यवसाय समृद्ध बन गया।

सबसे बड़ी आशीष यह रही है कि, मैं बहुत ही स्वस्थ हूँ और यह भी कि, 70 की उम्र में भी मेरा कोई अंग बीमार नही है। मैं इसके लिए बहुत ही धन्यवादी हूँ। परमेश्वर ने मेरी पत्नी को भी स्वस्थ की आशीष दी है। मैं और मेरी पत्नी 7 सालों से मानमिन समर रिट्रीट की बिग बैलून रेस में हिस्सा लेते आ रहें है।

मैं सारा धन्यवाद और महिमा पिता परमेश्वर को देता हूँ जिसने मुझे आशीष दी है कि मैं एक स्वस्थ और बहुमूल्य जीवन जीऊँ।

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