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वंदना (30, दिल्ली भारत)

मेरा पूरा परिवार जीवित परमेश्वर से मिला, और एक गृह कलीसिया शुरू की।

क्योंकि मैंने हिंदू पुरुष से विवाह किया था, इसलिए मेरा मसीही जीवन आसान नहीं था। मेरे परिवार ने मुझ पर बुरी तरह सताव किया। मुझे छुपकर प्रार्थना करनी पड़ती थी। परमेश्वर का धन्यवाद हो, 8 साल की प्रार्थना और उपवास के बाद, मेरे पति ने प्रभु को स्वीकार किया, और मैं उनके साथ चर्च जा सकती थी।

मैं कई कलीसियाओं में गई, लेकिन मेरे हृदय में एक अधूरी प्यास थी। मैं एक ऐसे पास्टर की तलाश कर रही थी जो मुझे परमेश्वर का सच्चा वचन सिखा सके, और जो प्रेम से भरा हो।

इस पुस्तक के लेखक, ”क्रूस का संदेश” निश्चित रूप से सत्य की ओर ले जा सकते है ।

एक दिन, मेरे पड़ोसी ने मुझे ”क्रूस का संदेश”, ”विश्वास का परिणाम”, और ”नरक” किताबें दी। जब मैंने उन किताबों को पढ़ा, तो मुझे महसूस हुआ कि इन किताबों के लेखक डॉ जेरॉक ली ही सच्चे पास्टर हैं, जो सत्य की ओर अगुवाई कर सकते हैं। ” मैं उनसे मिलना चाहती थी और मानमिन कलीसिया में जाना चाहती थी।

जल्द ही, मुझे यह जानकर खुशी हुई कि कलीसिया से एक चिकित्सा दल द्वारा आयोजित चंगाईयों की गवाही और सेमिनार होगा। जब मैं वहाँ गई तो मुझे वहाँ जीवन के वचन, परमेश्वर की सामर्थ, स्तुति और आराधना, और प्रार्थना के कार्यों से बहुत ही स्पर्श हुई। मेरी आँखों से आँसू बहते रहे जब कलीसिया के पास्टर जॉन ने उस रूमाल से प्रार्थना की, जिस पर डॉ जेरॉक ली ने प्रार्थना की थी।

2015 अगस्त से, मैंने चर्च जाना शुरू किया और तब से, मेरे जीवन में कई बदलाव आए। मैं और मेरे पति बहुत बहस करते थे, लेकिन अब हम एक-दूसरे को समझने लगे हैं। मेरा परिवार शांति का परिवार बन गया, जिसका बीमारियों से कोई लेना-देना नहीं है।

कई महीनों तक, मैं अपने पैरों की नस कांपने के कारण रात में अच्छी तरह से सो नहीं पाती थी। लेकिन बीमारों के लिए डॉ.जेरॉक ली की प्रार्थना ग्रहण करने के बाद, मैं चंगी हो गई। मेरे दोनों बेटे निमोनिया के कारण अस्पताल जाते रहते थे, लेकिन मानमिन चर्च में जाने के बाद वे कभी अस्पताल नहीं गए। विशेष रूप से, मेरा दूसरा बेटा टाइफाइड के कारण एक महीने के लिए स्कूल नहीं जा सका। लेकिन परमेश्वर की सामर्थ के रूमाल की प्रार्थना ग्रहण करने के बाद, वह चंगा हो गया।

मेरा पूरा परिवार, यहाँ तक कि मेरी ससुराल वालों ने भी परमेश्वर की सामर्थ का अनुभव किया।

जब भी मैं बीमार लोगों या समस्याओं वाले लोगों से मिली, मैंने अपने चंगाई के बारे में उनके साथ अपनी गवाही बांटी और मानमिन कलीसिया के बारे मे बताया। मैंने उन्हे बताया कि यीशु मसीह हमारा उद्धारकर्ता क्यों है। जैसे ही मैंने उन्हें चंगाई के कार्यों की गवाही के साथ, डा. जेरॉक ली के संदेष क्रूस का संदेष ’के बारे में बताया तो उनको सुसमाचार प्रचार किया गया।

चर्च के पास्टर, पास्टर जॉन दल्लुपूरा आने के लिए एक घंटा गाडी चलाकर वहां आते थे, और बहुत से लोगों के लिए प्रार्थना करते थे। जल्द ही, मैंने घर में रविवार सभा की शुरुआत की और लगभग 20 लोगों के साथ यह एक गृह कलीसिया बन गई। अब, हमारे पास दानिय्येल प्रार्थना सभा, बुधवार की सभा, और शुक्रवार को संपूर्ण रात्रि सभा भी है और परमेश्वर नए सदस्यों को भेजते रहते हैं, हाल्लेलुयाह!

मेरी बहुत दिलचस्प गवाही है। मेरे घर में बहुत से चूहे और चींटियाँ थीं। प्रार्थना ग्रहण करने के बाद, वे गायब हो गए, लेकिन जल्द ही वे फिर से वापस आ गए। फिर, मैंने संपूर्ण दशवांश के बारे में संदेश सुना। मैंने परमेश्वर की इच्छा को समझा और उसका पालन किया। जल्द ही सभी चूहे गायब हो गए, और घर में से चींटियां (यहां तक कि बिस्तर पर से) भी चली गई। जैसा कि हमने संपूर्ण दषवांष दिया, मेरे पति को एक व्यवसाय खोलने की आषीष मिली।

मेरी सास भी हर्नियेटेड डिस्क और गठिया से पीड़ित थी, लेकिन परमेश्वर के सामर्थ के रूमाल से प्रार्थना ग्रहण करने के बाद वह चंगी हो गई। वह अब अच्छी तरह से चल सकती है। इससे पहले, वह परमेश्वर का नाम भी नहीं सुनना चाहती थी, लेकिन वह बदल गई। वह अंगीकार करती है, कि वह मानमिन की भेड़ है।

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