क्रूस का संदेश (1) – सृष्टिकर्ता परमेश्वर Srishtikarta Parmeshvar kaun hai ( Who is God the Creator ) – Kroos ka sandesh (1)

क्रूस का संदेश (1) – सृष्टिकर्ता परमेश्वर Srishtikarta Parmeshvar kaun hai ( Who is God the Creator ) – Kroos ka sandesh (1)

Srishtikarta Parmeshvar kaun hai

आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।

उत्पत्ति 1:1

यीशु मसीह के नाम से संसार भर के दर्शकों से मिलकर, मुझे बहुत खुशी हुई।मैं सियोल कोरिया में स्थित मानमिन सेंट्रल चर्च का सीनियर पास्टर रेव. जेरॉक ली हूं।संदेशों का शीर्षक, जिसे मैं आज से आपके साथ साझा करना चाहूंगा, वह है क्रूस का संदेश।

क्रूस का संदेश स्पष्ट रूप से मनुष्य के उद्धार के लिए परमेश्वर का प्रावधान बताता है।

  • Srishtikarta Parmeshvar kaun hai ?

यह गहरा रहस्य है, जो समय शुरू होने से पहले छिपा हुआ था और हमें परमेश्वर के महान प्रेम और न्याय का एहसास कराता है। परमेश्वर कौन है?

क्या कारण है कि परमेश्वर ने स्वर्ग और पृथ्वी को बनाया , इसमें सब कुछ, मानव जाति और उसे इस धरती पर रहने दिया?

परमेश्वर ने भले और बुरे के ज्ञान का वृक्ष क्यों लगाया? यीशु मसीह कौन है और वह मनुष्य जाति के लिए एकमात्र उद्धारकर्ता क्यों है?

जब हम यीशु मसीह में विश्वास करते हैं, तो हमें उद्धार क्यों मिलता है? क्रूस के संदेश में इन सवालों के सभी उत्तर हैं।
चूंकि मैंने पहली बार 1985 में इस संदेश का प्रचार किया था, इसने न केवल कोरिया में बल्कि पूरी दुनिया में बहुत सी आत्माओं को उद्धार के रास्ते तक पहुँचाया।

यह संदेश ऑडियो और वीडियो टेप पर और किताबों के द्वारा प्रसारित किया गया है।
अनगिनत लोगों ने इस संदेश के माध्यम से परमेश्वर के चमत्कारी कार्यों का अनुभव किया।

उन्होंने अपने हृदय की गहराई से अपने पापों का पश्चाताप किया और स्वर्ग के राज्य के लिए सच्चा विश्वास और खरी आशा प्राप्त कर पाऐं। वे अपने पापों को दूर कर पाऐं और परमेश्वर के वचनों के अनुसार चल पाऐं।
जब मैंने यीशु मसीह के नाम से प्रार्थना की, संदेश के माध्यम से, वो पश्चाताप करने पाऐं, तो उन्होंने परमेश्वर की सामर्थ के अद्भुत कार्यों का अनुभव किया। उनकी बीमारीयां ठीक हो गई और दुर्बलताएँ ठीक हो गईं। दुष्ट आत्माऐं और अंधकार की शक्तियां वोे बाहर निकाल दी गई।

आप इन संदेशो को वीडियो के माध्यम से भी देख सकते है – GCNTVHINDI ( Srishtikarta Parmeshvar kaun hai )

जिसने भी उद्धार के मार्ग की बात सुनी और उद्धार के मार्ग का एहसास किया। उन्होंने यीशु मसीह में परमेश्वर की सामर्थ के चमत्कारी कार्यों का अनुभव किया।मैं प्रभु के नाम से प्रार्थना करता हूं कि आप आज क्रूस के इस संदेश के माध्यम से अद्भुत कार्यों का अनुभव कर पाऐं ।

प्रिय भाइयों और बहनों, जब आप चर्च में जाते हैं और मसीह में जीवन जीते हैं, तो आप मसीहत में उद्धार के मार्ग के बारे में सुनते है।आइऐं हम इसकी संक्षिप्त तौर पर समीक्षा करें। लगभग 2,000 साल पहले, परमेश्वर का पुत्र यीशु, इस पृथ्वी पर मानव जाति को उनके पापों से छुड़ाने के लिए आया था।

आपमें से बहुत से लोग केवल इतना जानते हैं कि, यीशु को क्रूस पर चढ़ाया गया, मानव जाति को उनके पापों से को छुड़ाने के लिए और उसे गाड़ा गया। और वह तीसरे दिन फिर से जीवित हो उठा। जो लोग इस तथ्य पर विश्वास करतेे हैं, उनके पाप क्षमा हो जांऐगे और उद्धार को प्राप्त करेंगे और स्वर्ग में जाऐंगे।लेकिन हम यह कह नहीं कह सकते, कि हम केवल इतने ही ज्ञान के साथ वास्तव में परमेश्वर के प्रावधान को जानते है, जो क्रूस के संदेश में पाया जाता हैं।

उदाहरण के लिए, आपको क्या लगता है, कि क्यों परमेश्वर ने भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष को लगाया था? मनुष्य का पाप में गिरने का कारण यह था कि आदम ने भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष से खाया था।यदि वृक्ष होता ही नहीं,तो आदम पाप नही करता, और वह अदन की वाटिका में हमेशा के लिए शांतिपूर्वक रहता।

तो क्या परमेश्वर को भलेे और बुरे के ज्ञान का वृक्ष को पहले ही नहीं बनाना चाहिए था? क्यों परमेश्वर ने वह वृक्ष वहीं लगाया, जहाँ से आदम उसमे से खा सकता था?क्या परमेश्वर यह नहीं जानते थे कि आदम भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष से खाएगा? परमेश्वर सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञानी है और वह निश्चित रूप से इसे जानता था।

फिर भी, परमेश्वर ने ज्ञान का वृक्ष वहाँ लगाया। इसका क्या कारण हैं ?

क्या आप इन प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर दे सकते हैं?
क्या आपने पहले कभी इस प्रश्न का स्पष्ट उत्तर सुना है?
बेशक, ऐसा नहीं है कि हम उद्धार नहीं पायेंगे अगर हम नहीं जानते कि परमेश्वर ने भले और बुरे के ज्ञान का पेड़ क्यों लगाया।
यदि हम अपने पापों से पश्चाताप करते हैं और यीशु मसीह को हमारे व्यक्तिगत उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करते हैं, तो हमें बचायें जा सकते है।

लेकिन अगर आप उद्धार के मार्ग में पाए जाने वाली गहरी बातों को समझते हैं, तो आपके पास और भी अधिक खरा विश्वास हो सकता है।आप परमेश्वर के हृदय और इच्छा को स्पष्ट रूप से समझेंगे और एक विजयी मसीही जीवन जीएंगे। आप शैतान के प्रलोभनों को दूर करने में सक्षम होंगे और परमेश्वर की संतान के अधिकार का आनंद लेंगे, जो ज्योति है।

मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। अगर आप एक संतरा खाते हैं, तो सिर्फ इसे खाने से आपको फायदा होगा।लेकिन, बेहतर होगा कि आप यह जानकर खाएं कि इसमें किस प्रकार के पोषक तत्व हैं और उन पोषक तत्वों से हमें क्या लाभ होता है।

उदाहरण के लिए, मान लें कि आपको पता चला है कि संतरे में बहुत सारा विटामिन सी होता है और यह त्वचा के लिए अच्छा होता है, यह थकावट कम करता है, और रोगों के खिलाफ प्रतिरोध को बढ़ावा देता है।
फिर, आप इसे न केवल इसलिए खाएंगे क्योंकि यह स्वादिष्ट है बल्कि आप इसे जरूरत पड़ने पर भी खाएंगे।
विश्वासी जीवन में भी ऐसा ही है।

आपको केवल यह नहीं कहना चाहिए, मैं विश्वास करता हूं, लेकिन स्पष्ट रूप से क्रूस में परमेश्वर के प्रावधान को समझना है और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीना चाहिए। फिर, आप दृढ़ विश्वास के साथ स्वर्ग की ओर बढते जाऐंगे और इस पृथ्वी पर परमेश्वर की संतान के रूप में आशीषें प्राप्त करेंगें।मैं आपसे विनती करता हूं कि आप अपने हृदय में क्रूस के संदेश छाप ले जिसे, मैं आज से शुरू करूंगा।

मैं प्रभु के नाम से प्रार्थना करता हूं कि आप क्रूस में परमेश्वर के उद्धार को महसूस करेंगे और अनुग्रह और ताकत प्राप्त करेंगे।

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मसीह में प्रिय भाइयों और बहनों, जो सदस्य संसार भर में उपग्रह के माध्यम से सभा में भाग ले रहे हैं, शाखा कलीसियाओं के स्दस्य, स्थानीय भवन, लाइट एंड सॉल्ट मिशन, रेस्तरां मिशन के सदस्य, जो सदस्य दुनिया भर में इंटरनेट पर सभा में भाग ले रहे हैं, प्रिय दर्शकों, और संडे स्कूल के बच्चों, पहले हिस्से में जो आप क्रूस के संदेश में सीखेंगे, वह परमेश्वर के बारे में बताता हैं।


इस दुनिया में बहुत से लोग इस बात पर जोर देते हैं कि कोई परमेश्वर है ही नहीं । ऐसे अन्य लोग भी हैं जो मनुष्य की कल्पना से निर्मित देवताओं की पूजा करते हैं या परमेश्वर के जीवों की छवियां बनाते हैं और उन्हें देवताओं के रूप में पूजते हैं।

लेकिन भले ही हम उसे नहीं देख सकते, परमेश्वर निश्चित रूप से जीवित है, और केवल एक और एकमात्र ईश्वर है जिसकी हमें आराधना करनी है।परमेश्वर ब्रह्मांड ,सभी चीजों का और मानव जाति का सृष्टिकर्ता है। वह सभी चीजों पर शासक और न्यायाधीश है। परमेश्वर किस प्रकार का प्राणी है?वास्तव में, मनुष्य के लिए परमेश्वर के बारे में व्याख्या करना आसान नहीं है। मनुष्य एक मात्र प्राणी है। परमेश्वर मनुष्य की सभी सीमाओं से परे हैै। परमेश्वर असीमित है।

हम अपने ज्ञान के साथ कितना भी मनन करें, हम परमेश्वर के बारे में पूरी तरह से समझ और जान नहीं सकते।

लेकिन भले ही हम पूरी तरह से परमेश्वर के बारे में नहीं जान सकते, लेकिन बुनियादी चीजों को हमें परमेश्वर की संतान के रूप में जानना होगा। मैं चार अलग-अलग पहलुओं के बारे में बात करूंगा कि परमेश्वर कौन है?सबसे पहले, परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी का सृष्टिकर्ता हैं। उत्पत्ति 1ः1 कहता है, आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी कीे सृष्टि की।

उत्पत्ति का अध्याय 1 हमें बताता है कि छः दिनों में, परमेश्वर ने अपने वचन के द्वारा आकाश और पृथ्वी को कुछ नहीं से बनाया। सृष्टि के अंतिम दिन, छटवें दिन, उन्होंने मानव जाति के पूर्वज आदम को बनाया, जो कि पहला मनुष्य था।

इसी तरह, क्योंकि मनुष्य परमेश्वर के द्वारा बनाया गया है, वह सहज रूप से अपने हृदय में परमेश्वर के अस्तित्व को गहराई से महसूस करता है।सभोपदेशक 3ः11 कहता है, उसने सब कुछ ऐसा बनाया कि अपने अपने समय पर वे सुन्दर होते है फिर उसने मनुष्यों के मन में अनादि-अनन्त काल का ज्ञान उत्पन्न किया है, तौभी अनादि-अनन्त काल का ज्ञान उत्पन्न किया है, वह आदि से अन्त तक मनुष्य बूझ नहीं सकता। ”

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जैसा कि कहा गया है, परमेश्वर ने मनुष्य को उनके हृदयों में अनंत काल का ज्ञान दिया है।क्योंकि उनके पास यह है, भले विवेक वाले लोग परमेश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं और उसे खोजते हैं भले ही उन्होने परमेश्वर के बारे में न सुना हों या न जानते हों।

यहां तक कि उनमें भी जो कहते हैं, मैं परमेश्वर में विश्वास नहीं करता, ये वे लोग हैं जो आने वाले जीवन के बारे में ये सोचते हुए डरते हैं कि, अगर स्वर्ग और नरक है, तो क्या होगा? इसलिए, वे नरक में न जाने के लिए भलाई में जीने की कोशिश करते हैं।रोमियों 1ः20 कहता है, क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं।

जैसा कि कहा गया है, भले ही हम परमेश्वर को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख सकते हैं, हम महसूस कर सकते हैं कि परमेश्वर सृष्टिकर्ता है और केवल एक ही सृष्टिकर्ता है, क्योंकि परमेश्वर सृष्टिकर्ता का प्रमाण परमेश्वर द्वारा बनाए गए ब्रह्मांड में सभी चीजों में अंतर्निहित है। मैं आपको एक ऐसा उदाहरण देता हूं। इस दुनिया में बहुत से लोग हैं। कई नस्ल और जातीय समूह हैं जिनकी विभिन्न भाषाएं, संस्कृतियां और त्वचा के रंग अलग हैं ।

लेकिन उन सभी में कुछ चीजें समान हैं। सभी लोगो और जातीय समूहों की दो आँखें हैं। इन सभी के दो कान, एक नाक और एक मुंह होता है। सभी की जगह भी समान हैं। चेहरे के बीच में नाक है और आँखें ऊपरी हिस्से में हैं। मुंह नाक के नीचे है, और कान, चेहरे के दोनों तरफ हैं।

लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल मनुष्यों की संरचना और स्थान समान हैं। यह जानवरों के साथ भी समान है। हवा के पक्षी, समुद्र में, कीड़े और मछली। प्रत्येक प्रजाति की विशेषता के अनुसार सूक्ष्म अंतर है, लेकिन मूल रूप से उन सभी की संरचना समान है।

इसके अलावा, उनके पास पाचन तंत्र और प्रजनन प्रणाली की समान संरचनाएं हैं। इस समानता का कारण यह है क्योंकि चीजों को केवल एक ही सृष्टिकर्ता परमेश्वर के डिजाइन द्वारा बनाया गया था।

संसार के लोग डार्विनवाद के सिद्धांत पर जोर देते हैं, और परमेश्वर की सृष्टि का इनकार करते हैं।
लेकिन अगर मानव जाति का विकास हुआ है जैसा कि वे कहते हैं, हमारे पास समान संरचना नहीं होती।
हम कई प्रकार के रूपों और संरचनाओं में विकसित हो सकते थे।
इसके अलावा, अगर एक से अधिक सृष्टिकर्ता होते, तो पुरुषों और जानवरों के समान तरीके से संरचनाएं नहीं होतीं।

ऐसा इसलिए है, क्योंकि यदि बहुत से सृष्टिकर्ता थे, तो उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार संरचनाओं और कार्यों के साथ अपने प्राणियों को बनाया होगा।लेकिन यह देखते हुए कि लगभग सभी चीजों में एक संरचना और कार्य है, हम निश्चित रूप से समझ सकते हैं कि वे केवल एक सृष्टिकर्ता परमेश्वर द्वारा डिजाइन और निर्मित किए गए थे।

  • Evolution vs Creation ( vikashvaad ya srishti )

प्रिय भाइयों और बहनों, डार्विनवादियों का कहना है कि जीवित जीव, निम्न स्तर के जीवों से उच्च स्तर के जीवों में विकसित हुए हैं। (Charles Robert Darwin’s theory of Evolution )

लेकिन उत्पत्ति 1ः21 में कहा गया है, इसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़ने वाले पक्षियों की भी सृष्टि की और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।

इसके अलावा, उत्पत्ति 1ः25 कहता है, सो परमेश्वर ने पृथ्वी के जाति जाति के वन पशुओं को, और जाति जाति के घरेलू पशुओं को, और जाति जाति के भूमि पर सब रेंगने वाले जन्तुओं को बनाया और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
समय बीतने के साथ रूपों में थोड़े बदलाव हुआ हैं, लेकिन परमेश्वर ने सब कुछ उनकी जाति जाति के अनुुसार बनाया है।

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मछलियों से कोई स्तनधारी प्राणी नही बना, और न ही स्तनधारी से कोई पक्षी के रूप में विकसित हुआ हैं। ऐसा नहीं है कि वानर इंसानों में विकसित हुए। वानरों को वानर और मनुष्य को मनुष्य के रूप में बनाया गया था। इसके अलावा, केवल मनुष्यों को परमेश्वर के स्वरूप में बनाया गया था, जिसमें आत्मा, प्राण और देह है।

कोई भी वानर चाहे कितना भी मनुष्य के सदृष क्यों न हो, वह परमेश्वर के अस्तित्व को महसूस नहीं कर सकता है और न ही मनुष्य के समान परमेश्वर की आराधना करता है क्योंकि उसमें आत्मा नही होती। इसके अलावा, जब हम प्रकृति को देखते हैं, तो हम सृष्टिकर्ता परमेश्वर की सृष्टि के अधिक प्रमाण देख सकते हैं। पृथ्वी दिन में एक बार घूमती है और वर्ष में एक बार सूर्य की परिक्रमा करती है और चंद्रमा महीने में एक बार पृथ्वी की परिक्रमा करता है।

इन क्रांतियों और घुमावों के द्वारा, हमारे पास पृथ्वी पर चीजे क्रमानुसार चलती हैं।

हमारे पास दिन और रात और चार मौसम हैं। ज्वार भाटा का उतार और चढ़ाव है और हवा का बहाव हैं।

और, स्वर्गीय खंडो का ये संचलन और स्थान उपयुक्त तौर पर स्थापित किए गए है ताकि मनुष्यजाति के लिए यह उपयुक्त और ठीक हो और जीवित प्राणी जीवन निर्वाह कर सके ।सूर्य और पृथ्वी के बीच में और पृथ्वी और चांद के बीच में अपने अक्ष पर जो दूरी वह बहुत ही उचित दूरी है।
यह या तो बहुत दूर हो सकती या ज्यादा करीब हो सकती है अपनी वर्तमान दूरी से।
पृथ्वी इस तरह से क्रमानुसार असंख्य सालो से बिना किसी त्रुटि के , बिल्कुल उचित दूरी बनाए हुए घूम रही है और चक्कर लगा रही है।


क्या आपको लगता है कि ये सभी क्रम बिग बैंग के द्वारा हो सकते हैं क्योंकि कुछ वैज्ञानिक जोर देते हैं?
आप सामान्य ज्ञान का उपयोग क्यों नहीं करते? यदि आप एक घड़ी खोले उसमें बहुत से छोटे छोटे पुरजे एकत्रित होते है बिल्कुल उचित तौर पर ताकि घड़ी चल सके।


आइए अब मान लें कि कोई व्यक्ति आपको यह दिखा रहा है और आपको निम्नलिखित बता रहा है “किसी ने भी यह घड़ी नहीं बनाई है। ज्वालामुखी के फटने से वे हिस्से बाहर आ गए और वे खुद ही इकट्ठे हो गए और घड़ी चलने लगी। ”क्या आप इस पर विश्वास कर पाएंगे? जब तक आप मूर्ख नहीं होंगे, आप कभी इस पर विश्वास नहीं करेंगे। लेकिन यह कहना कि यह दुनिया और जो कुछ उसमें बना है वह विकासवाद से बना है, यह कहने से इसका कम मतलब बनता है।

एक ब्रह्मांड की गति, जो घड़ी की तुलना में अतुलनीय रूप से अधिक सटीक है, कैसे किसी घटना का नतीजा हो सकता है ?
कैसे ऐसा विस्तृत ब्रह्माण्ड एक कड़े रूप में खुद से संचलित को सकता हैं? यह केवल इसलिए संभव है क्योंकि ब्रह्मांड और उसमें सब कुछ की बनावट परमेश्वर ने की है और वही इसे चलाता है।सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने इन सभी चीजों को अपनी सामर्थ से बनाया है और उन्हें संचालित करता है। क्योंकि हमारे पास इस तरह के प्रमाण हैं, कोई भी अंतिम न्याय के दिन बहाना नहीं बना पाएगा।

कोई भी नहीं कह सकता, मैने सोचा कि कोई परमेश्वर है ही नहीं।

मसीह में प्रिय भाइयों और बहनों, ऐसा क्यों है कि लोग विश्वास नहीं करते हैं, जो इस तरह के सृष्टि के स्पष्ट प्रमाण को देखते हैं?ऐसा इसलिए है क्योंकि वे केवल वही मानते हैं जो उनकी आंखों से दिखता है, उनके हाथों से छुआ जाता है, और उनके ज्ञान और विचारों के साथ समझा जाता है।वे इस तथ्य को स्वीकार नहीं करते हैं कि एक जीवित अदृश्य परमेश्वर है। वे बाइबल में अभिलिखित चिन्हों और चमत्कारों को स्वीकार नहीं करते हैं। लेकिन बाइबल के सभी शब्द सत्य ही हैं। यह सच है कि परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की रचना की और चिन्ह, चमत्कार और सामर्थी कार्य वास्तव में हुए।

ये चीजें केवल सृष्टिकर्ता परमेश्वर के द्वारा ही की जा सकती हैं। यूहन्ना 4ः48 कहता हैं, यीशु ने उस से कहा, जब तक तुम चिन्ह और अद्भुत काम न देखोगे तब तक कदापि विश्वास न करोगे।
मनुष्यों के विचार और रूपरेखा तब टूट जाती है, वे ऐसे चिन्ह और चमत्कार देखते हैं जो मानवीय सीमाओं से परे हैं।

जब वे परमेश्वर के कार्यों से कुछ अनुभव करते हैं जो उन्होंने सोचा था कि यह बिल्कुल असंभव है, तभी वे स्वीकार कर सकते हैं कि केवल परमेश्वर का वचन सत्य है, हालांकि यह उनके विचारों के साथ मेल नहीं खाता है।
इसलिए, बाइबल में, परमेश्वर ने हमें बहुत से उसकी सामर्थ के कार्यों और चमत्कारों के माध्यम से दिखाया कि वह जीवित परमेश्वर हैं।

मिस्र में फिरौन और उसके अधिकारियों के लिए, मूसा ने दस विपत्तियों के माध्यम से जीवित परमेश्वर का प्रदर्शन किया।
एलिय्याह ने स्वर्ग से आग उतारी और सूखे के साढ़े 3 साल बाद स्वर्ग से बारिश उतारी।यीशु ने चिन्ह और चमत्कारों के माध्यम से प्रमाणित किया कि वह परमेश्वर का पुत्र है।

प्रेरित पौलुस ने बीमारियों और दुर्बलताओं को ठीक किया, दुष्ट आत्माओं को बाहर निकाला और यीशु मसीह के नाम पर मृतकों को पुनर्जीवित किया। जब लोगों ने इन चीजों को देखा जो केवल सृष्टिकर्ता परमेश्वर के द्वारा किया जा सकता था, यहां तक कि अविश्वासियों ने भी सृष्टिकर्ता परमेश्वर को ग्रहण किया। उन्होंने सुसमाचार और उद्धारकर्ता यीशु मसीह को ग्रहण किया।

यहाँ तक की, आज हम जिस दौर में जी रहे हैं, इस समय में भी परमेश्वर के ये कार्य आवश्यक हैं।
परमेश्वर के चिन्ह और चमत्कार प्रकट करने की सामर्थ अविश्वासियों को जीवित सृष्टिकर्ता परमेश्वर, में विश्वास करने के लिए सबसे ठोस सबूत है।इस कलिसिया की शुरूआत होने के समय से ही अनगिनत चिन्ह और चमत्कार हो रहे हैं, और जैसे-जैसे समय बीत रहा है, अधिक सामर्थी कार्य हो रहे हैं।उदाहरण के लिए, कैंसर और एड्स जैसी लाइलाज बीमारियां और दुर्बलताएं और शारीरिक अपंगताएं परमेश्वर की सामर्थ से ठीक हो रही हैं।

ये चंगाई के कार्य फिलीपींस, होंडुरस, भारत, रूस, जर्मनी और पेरू सहित कई देशों में चिकित्सकीय डॉक्टरों द्वारा चिकित्सकीय रूप से सत्यापित किए जाते हैं। इन सबूतों के माध्यम से, संसार भर में बहुत से लोग परमेश्वर को स्वीकार करने और उनके हृदय में विश्वास करने पाए।
यहां तक कि बहुत अधिक ज्ञान रखने वाले और जो लोग मूर्तियों की पूजा करते थे, वे सृष्टिकर्ता परमेश्वर को स्वीकार करने लगे और जीवित परमेश्वर के कार्यों को देखते हुए उस पर विश्वास करते थे।

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ऐसे बहुत सारे मामले हैं, लेकिन मैं उनमें से सिर्फ एक-दो से आपको परिचित करवाता हूं।
मानमिन जूंग-आंग कलिसिया कीे सीनियर डिकनस यूं देउक किम उबलते हुए पानी से लगभग उनका पूरा शरीर जल गया था।

उनका चेहरे और हाथों सहित कुछ हिस्सों को छोड़कर अधिकांश शरीर गंभीर रूप से जल गया था। जैसा कि आप स्क्रीन पर देख सकते हैं, घांव इतना भीषण था कि वह मर गई होती, भले ही वह अस्पताल जाती। लेकिन जब मैंने यीशु मसीह के नाम से प्रार्थना की, तो गर्मी उसके शरीर से निकल गई और दर्द दूर हो गया। फिर, उनकी नसें, वाहिनी और त्वचा की कोशिकाऐं जो उबलते पानी से जल गई थी वो फिर से बनना शुरू हो गई।

चूँकि जो कोशिकाएँ जल चुकी थीं, वे पहले ही मर चुकी थीं, उन्हें मनुष्यों की विधि द्वारा पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता था। लेकिन सृष्टिकर्ता परमेश्वर, जिसने मनुष्यों को बनाया, पूरी तरह से जले हुए हिस्सों को फिर से नया बनाया।
उन्होंने कभी कोई दवा नहीं ली या अस्पताल नहीं गई, लेकिन उनकी देह एक बच्चे की देह के समान पूरी तरह से चंगी हो गई थी।

ज्यादातर मामलों में, अस्पतालों में इलाज के बाद भी लोगों पर बदसूरत निशान रह जाते हैं।लेकिन मेरी प्रार्थनाओं को प्राप्त करने के बाद, उनको कोई निशान नहीं हुआ, भले ही उसकी जलन इतनी गंभीर थी।
वह अब परमेश्वर के राज्य की सेवा करते हुए खुशहाल और स्वस्थ जीवन जी रही है।

मानमिन के कई अन्य सदस्य हैं जो गंभीर रूप से जल गए थे और विश्वास के साथ प्रार्थना प्राप्त करने से ठीक हो गए थे। उन मामलों में, उन सभी को किसी भी प्रकार का कोई निशान हुए बिना बहुत जल्दी ठीक हो गए, हालांकि उन्होंने कोई दवा नहीं लगाई।इसके अलावा, जुलाई 2002 में, जब हमने होंडुरस में क्रूसेड किया जहां पर हजारों लोगों ने हिस्सा लिया, तो परमेश्वर के कई अद्भुत कार्य हुए। मैं आपको केवल उन मामलों में से एक बताता हूं।

मारिया डोमिंगुएज, जो उस समय 12 साल की थीं, जब वह दो साल की थीं, तब उसने दाहिनी आंख की दृष्टि खो दी थी और उनका कॉर्निया बदला गया था।लेकिन सर्जरी अच्छी तरह से नहीं हुई, और वह 10 वर्षों तक कोई रोशनी नहीं देख सकी। लेकिन जब उसने होंडुरस क्रूसेड में भाग लिया और प्रार्थना ग्रहण की, तो वह देखने लगी।

सृष्टिकर्ता परमेश्वर की सामर्थ से जिसने मनुष्य की आंख बनाई, उसकी मृतक नसें फिर से पुनर्जीवित हो गईं। इन मामलों के अलावा, हमारी कलिसिया में सृष्टिकर्ता परमेश्वर के बहुत सारे कार्य हुए हैं। आप हमारी चर्च की वेबसाइट या मानमिन टीवी और अन्य संबद्ध संगठनों के होमपेज पर अपने लिए ये कार्य देख सकते हैं।
जैसा कि हम इन प्रमाणों के माध्यम से देख सकते हैं, परमेश्वर वास्तव में जीवित है और वह सृष्टिकर्ता है, जिसने आकाश और पृथ्वी और जों सब कुछ उसमें हैं बनाया।
निष्कर्ष,

मसीह में प्रिय भाइयों और बहनों, भजन संहिता 53ः1 कहता है, मूढ़ ने अपने मन में कहा है, कि कोई परमेश्वर है ही नहीं। वे बिगड़ गए, उन्होंने कुटिलता के घिनौने काम किए हैं कोई सुकर्मी नहीं।
मूर्ख और दुष्ट केवल परमेश्वर को नकारने का प्रयास करते हैं क्योंकि वे उसे देख नहीं सकते।

लेकिन जैसा कि आज संदेश में गवाही दी गई है, परमेश्वर वास्तव में जीवित है। सृष्टिकर्ता परमेश्वर का प्रमाण प्रकृति और उसकी सामर्थ के कार्यों में स्पष्ट रूप से देखा जाता है।

सभोपदेशक 12ः13 कहता है, सब कुछ सुना गया अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्तव्य यही है।
मुझे आशा है कि आप निश्चित रूप से परमेश्वर पर विश्वास करेंगे, उससे डरेंगे और उसकी आज्ञाओं का पालन करेंगंे।
जब आप उस तरह से मनुष्य का कर्तव्य करते हैं, तो सृष्टिकर्ता परमेश्वर आपको स्वर्ग के राज्य की ओर अगुवाई करेगा और आपकी प्रार्थनाओं और आपके हृदय की इच्छाओं का उतर देगा।

वह उन समस्याओं को भी हल कर सकता है जो मनुष्य द्वारा अपनी सामर्थ से हल नहीं की जा सकती हैं।

जब आप इस तरह से उतर और आशीषें प्राप्त करते हैं, तो आप यह कहते हुए अविश्वासियों को अधिक दृढ़ता से सुसमाचार प्रचार कर सकते हैं, मैं इस तरह से परमेश्वर से मिला और अनुभव किया है।
मैं परमेश्वर के नाम से प्रार्थना करता हूं कि आप अपने रोजमर्रा के जीवन में परमेश्वर के कार्यों का अनुभव करेंगे और उसे महिमा देंगे।

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